Chenab Railway Bridge: जम्मू और कश्मीर के रियासी जिले में चेनाब नदी पर बना चेनाब रेल पुल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का सबसे ऊँचा रेल पुल है। यह सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग का गर्व और कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चलिए आपको इस पुल के कुल खर्च, मजबुताई और विशेषताओं के बारे में रोचक जानकारी देते है।

कहाँ है यह पुल?
यह पुल कौरी और बक्कल नामक दो गाँवों के बीच बना है और जम्मू-बारामुल्ला रेलवे लाइन पर स्थित है। यह रेल पुल घाटी के बीचों-बीच चेनाब नदी पर बना है, जिससे यहाँ के ऊँचे-नीचे पहाड़ी इलाकों को पार करके रेल लाइन बिछाई जा सकी है।
पुल की लंबाई और ऊँचाई
चेनाब नदी की गहरी खाई पर बना यह भव्य पुल स्टील और कंक्रीट से तैयार किया गया है। इसकी कुल लंबाई 1,315 मीटर (4,314 फीट) है। इसमें दो हिस्से हैं:
- एप्रोच ब्रिज: 530 मीटर (1,740 फीट) लंबा।
- डेक आर्च ब्रिज: 785 मीटर (2,575 फीट) लंबा।
इस पुल की सबसे खास बात यह है कि नदी तल से इसकी ऊँचाई 359 मीटर (1,178 फीट) है, यानी यह दुनिया का सबसे ऊँचा रेल पुल है।
इस पुल का महत्व
यह पुल जम्मू-कश्मीर को पूरे साल भारत के बाकी हिस्सों से जोड़कर रखेगा। सर्दियों में जब भारी बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो जाती हैं, तब भी इस पुल के जरिए रेल सेवा चलती रहेगी। यह पुल सिर्फ पर्यटन और व्यापार को ही नहीं, बल्कि हमारे देश की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम है।
परियोजना की शुरुआत कैसे हुई?
जम्मू-बारामुल्ला रेलवे परियोजना की शुरुआत 1983 में हुई थी। लेकिन निर्माण कार्य में वास्तविक प्रगति 1990 के दशक के मध्य में शुरू हुई, जब आवश्यक फंड आवंटित किए गए।
सबसे पहले जम्मू-उधमपुर खंड 2005 में पूरा हुआ, फिर उधमपुर-कटरा 2014 में शुरू हुआ और 2008-2013 के बीच बारामुल्ला-बनिहाल खंड बनकर तैयार हुए।
कटरा से श्रीनगर तक रेल लाइन पहुँचाने के लिए इंजीनियरों ने 1997 में सर्वे किया, जिसमें सामने आया कि पीर पंजाल की पर्वतमालाओं और गहरी घाटियों को पार करने के लिए कई सुरंगों और पुलों की जरूरत पड़ेगी। कटरा के करीब कौरी और
बक्कल के बीच चेनाब नदी को पार करने के लिए इस विशाल पुल का निर्माण तय किया गया।
डिज़ाइन और निर्माण
1) इस पुल के निर्माण की ज़िम्मेदारी भारतीय रेलवे के कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन को सौंपी गई।
2) इस परियोजना में WSP फिनलैंड ने मुख्य डिज़ाइनर के रूप में, लियोनहार्ट एंड्रा एंड पार्टनर ने मेहराब डिज़ाइन में, और वियना कंसल्टिंग इंजीनियर्स ने तोरण डिज़ाइन में मदद की।
3) भारतीय विज्ञान संस्थान और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भी इस पुल को भूकंप और विस्फोटरोधी बनाने में सहयोग किया।
4) इस पुल को 120 साल तक टिकाऊ बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
5) यह 100 किमी/घंटा की रफ्तार से रेल यातायात संभाल सकता है।
6) पुल को भूकंप (रिक्टर स्केल पर 8 तक), -20°C तापमान, 266 किमी/घंटा की तेज़ हवा और बम धमाकों जैसे खतरों को भी सहने लायक बनाया गया है।
7) पुल बनाने में करीब 28,660 टन स्टील और 66,000 क्यूबिक मीटर कंक्रीट इस्तेमाल हुआ।
8) स्टील की आपूर्ति सेल (Steel Authority of India) ने की।
9) भारी-भरकम स्पैन को जोड़ने के लिए हाई-फ्रिक्शन बोल्ट लगाए गए।
10) खास जगह के कारण इसमें करप्शन रोधी पेंटिंग भी की गई, जिसकी लाइफ करीब 15 साल है।
कितनी है लागत?
👉 चेनाब रेल पुल को बनाने में कुल 1486 करोड़ रुपये (₹14.86 बिलियन) की लागत आई है।
👉 अगर इसे अमेरिकी डॉलर में देखें तो यह करीब 180 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आसपास बैठती है।
क्यों बढ़ी लागत?
- डिज़ाइन बार-बार बदलना (2008 के बाद सुरक्षा कारणों से रोककर डिज़ाइन में सुधार)
- दुर्गम इलाकों में काम करना
- विशेष सुरक्षा उपाय (भूकंप, बम धमाके आदि से सुरक्षा)
- नई टेक्नोलॉजी और विदेशी विशेषज्ञों की सेवाएँ लेना
- कई बार काम रुकना और दोबारा शुरू होना
चुनौतियाँ और समय-सीमा
निर्माण के दौरान कई बार समय सीमा बढ़ानी पड़ी। शुरुआत में 2009 तक पुल का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन सुरक्षा चिंताओं और डिज़ाइन संशोधनों के चलते काम 2010 में दोबारा शुरू हुआ।
नवंबर 2017 में बेस सपोर्ट पूरे हुए और 2021 तक मेहराब भी बनकर तैयार हो गई। अगस्त 2022 में पुल पूरी तरह बनकर तैयार हुआ।
रेलवे पटरी बिछाने का काम 2023 में शुरू हुआ और जून 2024 में पहला ट्रायल रन आयोजित किया गया। अंततः 6 जून 2025 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पुल को नियमित रेल यातायात के लिए हरी झंडी दिखाई।
निष्कर्ष
चेनाब रेल पुल भारतीय इंजीनियरों के हुनर और कड़ी मेहनत का जीता-जागता उदाहरण है। यह सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि उम्मीदों और सपनों को जोड़ने वाली एक मजबूत कड़ी है। आने वाले वर्षों में यह पुल जम्मू-कश्मीर के लोगों को विकास, रोज़गार और सुविधा से जोड़कर रखेगा।
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