India’s First Hydrogen train: भारत ने परिवहन क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रेलवे मंत्रालय जल्द हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन (Hydrogen Train)लॉन्च करने की तैयारी में है।
यह ट्रेन एक आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक से चलती है, जो पारंपरिक डीजल इंजनों के मुकाबले ज्यादा स्वच्छ और किफायती है।
इस लेख में हम भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को विस्तार से जानेंगे।

हाइड्रोजन ट्रेन का महत्व
हाइड्रोजन-चालित ट्रेनें पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ये ट्रेनें हाइड्रोजन ईंधन सेल का उपयोग करती हैं, जो जल वाष्प के अलावा कोई हानिकारक उत्सर्जन नहीं करतीं, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
यह तकनीक विशेष रूप से उन मार्गों के लिए लाभदायक है जहां विद्युतिकरण संभव नहीं है।
परियोजना
भारतीय रेलवे ने अपनी पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन को पेश करने की योजना बनाई है।
यह परियोजना ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मौजूदा डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) ट्रेनों को हाइड्रोजन ईंधन सेल से सुसज्जित करना है।
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आर्थिक पहलू
प्रत्येक हाइड्रोजन ट्रेन की अनुमानित लागत ₹80 करोड़ है, जबकि प्रत्येक मार्ग पर ग्राउंड इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹70 करोड़ की आवश्यकता होगी। हालांकि प्रारंभिक लागत अधिक है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन के साथ यह कम हो सकती है।
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में बनाई जा रही है।
पहली हाइड्रोजन ट्रेन कहां चलेगी?
भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच 90 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर चलेगी, जिसमें 12 स्टेशन होंगे। ट्रेन की अधिकतम गति 140 किमी/घंटा होगी, जबकि संचालन गति 110 किमी/घंटा रखी जाएगी।

तकनीकी विवरण
पावर आउटपुट: यह 1,200 हॉर्सपावर (HP) की ताकत के साथ दुनिया की सबसे पावरफुल हाइड्रोजन ट्रेन होगी, जिसमें 800 किलोवाट ईंधन सेल से और 400 किलोवाट बैटरी से प्राप्त होगी।
ईंधन सेल प्रकार: प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) आधारित ईंधन सेल का उपयोग किया जाएगा।
हाइड्रोजन भंडारण: ट्रेन में हाइड्रोजन गैस को 350 बार (bar) दबाव पर संपीड़ित गैसीय हाइड्रोजन (CGH2) सिलेंडरों में संग्रहीत किया जाएगा।
सुरक्षा
भारतीय रेलवे ने हाइड्रोजन ट्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जर्मनी की TUV-SUD कंपनी को थर्ड-पार्टी सुरक्षा ऑडिट के लिए नियुक्त किया है।
हाइड्रोजन गैस अत्यधिक ज्वलनशील होती है, इसलिए टैंकों को विशेष सुरक्षा कवर और इमरजेंसी कट-ऑफ सिस्टम से लैस किया गया है। किसी भी लीक या आग की स्थिति में ऑटोमेटिक शटडाउन सिस्टम सक्रिय हो जाएगा।
किसी भी दुर्घटना या खराबी की स्थिति में इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम सक्रिय हो जाएगा। यात्रियों के लिए आपातकालीन Exit और वेंटिलेशन सिस्टम की व्यवस्था होगी।
इंडियन रेलवे का ग्लोबल लेवल पर विस्तार
भारतीय रेलवे केवल यात्री और माल परिवहन के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि रेलवे उपकरणों के निर्माण और निर्यात में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।
“मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत, रेलवे उपकरण निर्माण और एक्सपोर्ट में ग्लोबल लेवल पर टॉप पर जाने की सोच रही है।
सरकार एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका जैसे देशों में भारतीय रेलवे तकनीक का व्यापार बढ़ाने के लिए निर्यात कर रहा है।

पर्यावरणीय प्रभाव
इसमें कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं होगा, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आएगी और भारत को “ग्रीन रेलवे” (Green Railway) बनाने की दिशा में आगे बढ़ाएगा।
हाइड्रोजन ट्रेनों से ग्रीनहाउस गैसों (GHG) का उत्सर्जन कम होगा, जिससे ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन की गति धीमी हो सकती है।
हाइड्रोजन ट्रेनों का उपयोग भारत के “सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन” (Sustainable Transportation) के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा।
भविष्य की योजनाएं
यदि परीक्षण सफल होते हैं, तो भारतीय रेलवे 2030 तक इस तकनीक का विस्तार अन्य मार्गों पर करने की योजना बना रही है, जिससे देश में हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
भारतीय रेलवे हाइड्रोजन ट्रेन टेक्नोलॉजी को बड़े स्तर पर अपनाने की योजना बना रहा है। यह सिर्फ पर्यावरण बचाने का कदम नहीं, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर और आधुनिक रेलवे प्रणाली की ओर ले जाने वाली रणनीति है।
यदि यह परियोजना सफल होती है, तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोजन ट्रेन नेटवर्क विकसित कर सकता है।
निष्कर्ष
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह उन्नत रेलवे तकनीक में देश की प्रगति को भी दर्शाती है।
यह परियोजना सतत विकास और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करती है, जो आने वाले समय में परिवहन क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है।
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